# कालभैरवाष्टकम्

> ।।श्रीः।। ।।कालभैरवाष्टकम्।। देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रबिन्दुशेखरं कृपाकरम्। नारदादियोगिबृन्दवन्दितं दिगम्बरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।।1।। भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलक…

- **Canonical URL:** https://batukuvacha.com/posts/kaalbhairvaassttkm/
- **Published:** 2023-04-30
- **Publisher:** बटुक उवाच (Batuk Uvacha) — https://batukuvacha.com
- **Language:** Hindi (hi), with Sanskrit passages
- **Categories:** स्तोत्र
- **Tags:** आदिशङ्कराचार्यः, शिव

_Cite as: बटुक उवाच, “कालभैरवाष्टकम्”, https://batukuvacha.com/posts/kaalbhairvaassttkm/_

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> ।।श्रीः।। \

> ।।कालभैरवाष्टकम्।।

देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं

> व्यालयज्ञसूत्रबिन्दुशेखरं कृपाकरम्।

नारदादियोगिबृन्दवन्दितं दिगम्बरं
> काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।।1।।

भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं

> नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्।

कालकालमम्बुजाक्षमक्षशूलमक्षरं
> काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।।2।।

शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं

> श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्।

भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं
> काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।।3।।

भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं

> भक्तवत्सलं स्थिरं समस्तलोकविग्रहम्।

निक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं
> काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।।4।।

धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं

> कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम्।

स्वर्णवर्णकेशपाशशोभिताङ्गनिर्मलं
> काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।।5।।

रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं

> नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरञ्जनम्।

मृत्युदर्पनाशनं करालदंष्ट्रभूषणं
> काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।।6।।

अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसंततिं

> दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम्।

अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकाधरं
> काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।।7।।

भूतसङ्घनायकं विशालकीर्तिदायकं

> का[शिव](/posts/shivbhujngm/)ासिलोकपुण्यपापशोधकं विभुम्।

नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं
> काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।।8।।

कालभैरवाष्टकं पठन्ति ये मनोहरं

> ज्ञानमुक्तिसाधकं विचित्रपुण्यवर्धनम्।

शोकमोहलोभदैन्यकोपतापनाशनं
> ते प्रयान्ति कालभैरवाङ्घ्रिसंनिधिं ध्रुवम्।।9।।

इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य

श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य

श्रीमच्छंकरभगवतः कृतौ

> कालभैरवाष्टकं संपूर्णम्।।
