# कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ ~ विद्यापति

> कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ। दुखहि जनम भेल दुखहि गमाएब सुख सपनहु नहिं भेल, हे भोला... आछत चानन अवर गंगाजल बेलपात तोहि देब, हे भोला... यहि भवसागर थाह कतहु नहिं, भैरव धरु कर पाए, हे भोला... भव विद्यापति …

- **Canonical URL:** https://batukuvacha.com/posts/kkhn-hrb-dukh-mor-he-bholaanaath/
- **Published:** 2024-06-28
- **Publisher:** बटुक उवाच (Batuk Uvacha) — https://batukuvacha.com
- **Language:** Hindi (hi), with Sanskrit passages
- **Categories:** साहित्य
- **Tags:** भोलानाथ, विद्यापति

_Cite as: बटुक उवाच, “कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ ~ विद्यापति”, https://batukuvacha.com/posts/kkhn-hrb-dukh-mor-he-bholaanaath/_

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> कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ।

दुखहि जनम भेल दुखहि गमाएब सुख सपनहु नहिं भेल, हे भोला...

आछत चानन अवर गंगाजल बेलपात तोहि देब, हे भोला...

यहि भवसागर थाह कतहु नहिं, भैरव धरु कर पाए, हे भोला...

भव विद्यापति मोर भोलानाथ गति, देहु अभय बर मोहिं, हे भोला...

व्याख्यान :

> हे&nbsp;भोलानाथ!&nbsp;आप&nbsp;किस&nbsp;क्षण&nbsp;मेरी&nbsp;पीड़ा&nbsp;का&nbsp;हरण&nbsp;करेंगे।&nbsp;मेरा&nbsp;जन्म&nbsp;[वेद](/posts/ythemaan-vaacn-klyaanniim/)ना&nbsp;में&nbsp;ही&nbsp;हुआ&nbsp;है,&nbsp;दुःख&nbsp;में&nbsp;ही&nbsp;सारा&nbsp;जीवन&nbsp;बीता&nbsp;है,&nbsp;यहाँ&nbsp;तक&nbsp;कि&nbsp;स्वप्न&nbsp;तक&nbsp;में&nbsp;सुख&nbsp;का&nbsp;[दर्शन](/posts/1-paashcaaty-drshn-1-1-drshnkii/)&nbsp;मुझे&nbsp;नहीं&nbsp;हुआ&nbsp;है।&nbsp;हे&nbsp;प्रभो!&nbsp;मैं&nbsp;अक्षत,&nbsp;चंदन,&nbsp;गंगाजल&nbsp;और&nbsp;बेलपत्र&nbsp;को&nbsp;अर्पित&nbsp;कर&nbsp;आपकी&nbsp;आराधना&nbsp;करता&nbsp;हूँ।&nbsp;यह&nbsp;भवसागर&nbsp;अथाह&nbsp;है,&nbsp;अतः&nbsp;इस&nbsp;स्थिति&nbsp;में&nbsp;हे&nbsp;भैरव&nbsp;(भय&nbsp;से&nbsp;मुक्त&nbsp;करने&nbsp;वाले&nbsp;देव)&nbsp;आप&nbsp;ही&nbsp;आकर&nbsp;मेरा&nbsp;हाथ&nbsp;पकड़&nbsp;कर&nbsp;भवसागर&nbsp;में&nbsp;डूबने&nbsp;से&nbsp;बचाइए।&nbsp;विद्यापति&nbsp;कहते&nbsp;हैं&nbsp;कि&nbsp;प्रभु।&nbsp;आप&nbsp;ही&nbsp;मेरी&nbsp;गति&nbsp;हो,&nbsp;कृपा&nbsp;कर&nbsp;आप&nbsp;मुझे&nbsp;निर्भयता&nbsp;का&nbsp;वरदान&nbsp;दीजिए।

स्रोत :

पुस्तक : विद्यापति का अमर काव्य (पृष्ठ 139) रचनाकार : विद्यापति प्रकाशन : स्टूडेंट स्टोर बिहारीपुर बरेली संस्करण : 1965

निवेदन : मूल पुस्तक क्रय कर लेखक तथा प्रकाशक की सहायता करें
