# सरयूपारीण ब्राह्मणों’ का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) – ११

> गोत्रों में प्रमुख ब्राह्मण वंश अगस्त्य - पाण्डेय, त्रिपाठी उपमन्यु - ओझा, पाठक कण्व - द्विवेदी कश्यप - शुक्ल, मिश्र, पाण्डेय, ओझा, पाठक, द्विवेदी, चतुर्वेदी, उपाध्याय, त्रिपाठी कात्यायन - चतुर्वेद…

- **Canonical URL:** https://batukuvacha.com/posts/sryuupaariinn-braahmnnon-kaa-10/
- **Published:** 2024-09-03
- **Publisher:** बटुक उवाच (Batuk Uvacha) — https://batukuvacha.com
- **Language:** Hindi (hi), with Sanskrit passages
- **Categories:** सरयूपारीण
- **Tags:** pandit-gotra-list, अगस्त्य, उपमन्यु, उपाध्याय, ओझा, कण्व, कश्यप, कश्यप-गोत्र, कात्यायन, कुण्डिन, कुशिक, कृष्णात्रेय, कौशिक, गर्ग, गोत्र, गौतम, घृतकौशिक, चतुर्वेदी, चान्द्रायण, त्रिपाठी, दीक्षित, द्विवेदी, पराशर, पाठक, पांडेय-गोत्र-लिस्ट, पाण्डेय, पाण्डेय-ब्राह्मण-गोत्र, पाण्डेय-वंशावली, ब्राह्मण, ब्राह्मण-गोत्र-लिस्ट, भारद्वाज, भार्गव, मिश्र, मौनस, वत्स, वर्ण, वंशावली, वशिष्ठ, शाण्डिल्य, शुक्ल, संकृति, सरयूपारीण-ब्राह्मण-गोत्र, सावर्णि

_Cite as: बटुक उवाच, “सरयूपारीण ब्राह्मणों’ का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) – ११”, https://batukuvacha.com/posts/sryuupaariinn-braahmnnon-kaa-10/_

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## गोत्रों में प्रमुख ब्राह्मण वंश

अगस्त्य - पाण्डेय, त्रिपाठी

उपमन्यु - ओझा, पाठक

कण्व - द्वि[वेद](/posts/ythemaan-vaacn-klyaanniim/)ी

कश्यप - शुक्ल, मिश्र, पाण्डेय, ओझा, पाठक, द्विवेदी, चतुर्वेदी, उपाध्याय, त्रिपाठी

कात्यायन - चतुर्वेदी

कुण्डिन - शुक्ल, मिश्र, पाण्डेय

कुशिक - चतुर्वेदी

कृष्णात्रेय - शुक्ल, द्विवेदी

कौशिक - त्रिपाठी

गर्ग - शुक्ल, त्रिपाठी, पाण्डेय, द्विवेदी, उपाध्याय

गौतम - मिश्र, पाण्डेय, द्विवेदी, उपाध्याय

घृतकौशिक - मिश्र

चान्द्रायण - पाण्डेय

पराशर - शुक्ल, मिश्र, पाण्डेय, उपाध्याय

भारद्वाज - त्रिपाठी, मिश्र, पाण्डेय, द्विवेदी, उपाध्याय, पाठक, चतुर्वेदी

भार्गव - त्रिपाठी, चतुर्वेदी

मौनस - द्विवेदी

वत्स - मिश्र, पाण्डेय, द्विवेदी, त्रिपाठी

वशिष्ठ - त्रिपाठी, पाण्डेय, मिश्र, चतुर्वेदी

शाण्डिल्य - त्रिपाठी, पाण्डेय, दीक्षित, मिश्र

संकृति - त्रिपाठी, पाण्डेय, चतुर्वेदी

सावर्णि - पाण्डेय, चतुर्वेदी, मिश्र

श्रोत: हरिदास संस्कृत सीरीज ३६१, लेखक: पं. द्वारकाप्रसाद मिश्र , शास्त्री , चौखम्भा संस्कृत सीरीज ऑफिस , वाराणसी

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> हम आप सभी को अपने नित्यकर्मों जैसे संध्यावंदन, ब्रह्मयज्ञ इत्यादि का समर्पणपूर्वक पालन करने की अनुरोध करते हैं। यह हमारी पारंपरिक और आध्यात्मिक जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। \

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> हमारे द्वारा इन परंपराओं का समर्थन और संवर्धन हमारे समुदाय के भविष्य को उज्ज्वल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। आइए, हम सभी मिलकर इस दिशा में प्रयास करें और अपनी पारंपरिक मूल्यों को आधुनिक पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य करें। \

> हमें स्वयं शास्त्रों के अनुसार जीवन व्यतीत करना चाहिए जब हम दूसरों से भी ऐसा करने का अनुरोध करते हैं।
