2. रामराज्यका स्वरूप ~ मार्क्सवाद और रामराज्य ~ श्रीस्वामी करपात्रीजी महाराज
“‘रामराज्य’ शासन एवं प्रशासनका परम आदर्शस्वरूप है। धर्म एवं ईश्वरभक्ति—ये रामराज्यके प्राण हैं। शासनकी सुव्यवस्था, प्रजाकी सुखमयता और सम्पन्नता, अनुशासन एवं सदाचार—ये रामराज्यरूपी शरीरके अवयव हैं।”,“रामराज्यके स्वरूपका वर्णन वाल्मीकीय रामायण, अध्यात्मरामायण, आनन्दरामायण, पुराणों एवं श्रीरामचरितमानस आदिमें विस्तृत रूपसे उपलब्ध होता है। उसका कुछ अंश यहाँ साररूपमें प्रस्तुत किया जा रहा है—”,“(क) अध्यात्मरामायण”,“राघवे शासति भुवं लोकनाथे […]
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