“शुक्राचार्यजी अपने ‘नीतिसार’ में लिखते हैं कि श्रीरामके समान नीतिमान् राजा पृथ्वीपर न कोई हुआ और न कभी होना सम्भव ही है—”,“‘न रामसदृशो राजा पृथिव्यां नीतिमानभूत्।’”,“(शुक्र० ५।५७)”,“[श्रीराम लक्ष्मणजीसे कहते हैं—]”,“न हि स्वसुखमन्विच्छन् पीडयेत् कृपणं जनम्।”,“कृपण: पीडॺमानो हि मन्युना हन्ति पार्थिवम्॥”,“राजाको चाहिये कि वह अपने लिये सुखकी इच्छा रखकर दीन-दु:खी लोगोंको पीड़ा न दे; क्योंकि सताया… Continue reading 1. भगवान् श्रीरामके द्वारा उपदिष्ट राजनीति ~ मार्क्सवाद और रामराज्य ~ श्रीस्वामी करपात्रीजी महाराज