श्रेणी: सरयूपारीण
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सरयूपारीण ब्राह्मणों’ का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) – १४
## गोत्रों के वंशज ब्राह्मणों का विस्तार जैसा कि अध्याय ९ में बताया गया है कि सरयूपारीण ब्राह्मणों में इस समय निम्नलिखित
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गोत्रों का वेदादि विवरण अगस्त्य : वेद यजुर्वेद, उपवेद धनुर्वेद, ३ प्रवर वाशिष्ठ, ऐन्द्रप्रमद, आभरद्वसव्य, शाखा माध्यन्दि
सरयूपारीण ब्राह्मणों’ का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) – १२
प्रवर प्रत्येक ब्राह्मण का एक गोत्र होता है। वह वंश सूचक होता है कि ब्राह्मण किस ऋषि का वंशज है। उसके बाद उस ऋषि की परम्
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गोत्रों में प्रमुख ब्राह्मण वंश अगस्त्य - पाण्डेय, त्रिपाठी उपमन्यु - ओझा, पाठक कण्व - द्विवेदी कश्यप - शुक्ल, मिश्र, पा
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गोत्र 'गोत्र' शब्द के कई अर्थ होते हैं। किसी व्यक्ति के गोत्र से तात्पर्य उस व्यक्ति के आदि पुरुष से होता है जो कि उस वं
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पंक्ति और पंक्तिपावन ब्राह्मण सरयूपारीण ब्राह्मणों में पहिले बहुत सुशिक्षित, सच्चरित्र, आचारनिष्ठ ब्राह्मण हुये हैं। इन
सरयूपारीण ब्राह्मणों’ का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) – ८
सरयूपारीण ब्राह्मण की विशेषताएँ सरयूपारीण ब्राहणों में तीन विशेषताएँ पाई जाती हैं- (१) पंक्ति, (२) भोजन सम्बन्धी विचार,
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सरयूपारीण ब्राह्मणों में 'घर' सरयूपारीण ब्राह्मणों में प्रत्येक गोत्र वाले तथा एक स्थान पर रहने वाले औ परिवार वृद्धि आदि
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सरयूपारीण ब्राह्मण वंश में परिवर्तन किसी दूसरे गोत्र के ब्राह्मण की गद्दी (राशि) पर जाने पर वंश में परिवर्तन हो जाता है।
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सरयूपारीण ब्राह्मण-भेद सरयूपारीण ब्राह्मण वर्ग में शुक्ल, त्रिपाठी, मिश्र, पाण्डेय, पाठक, उपाध्याय, चतुर्वेदी और ओझा ब्र
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सरयूपार की सीमा सरयूपार भू भाग की सीमा दक्षिण में सरयू नदी, उत्तर में सारन और चम्पारन का कुछ भाग, पश्चिम में मनोरमा या र
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ब्राह्मण जन्म या कर्म से विशेष : यह लेक सरयूपारीण ब्राम्हणो के इतिहास से सम्बंधित ग्रथ का भाग है इस लिए यहाँ प्रेषित किय
सरयूपारीण ब्राह्मणों’ का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) – २
इतिहासकार और धर्मग्रन्थ दोनों यह बतलाते हैं कि समाज में 'ब्राह्मण वर्ण' सर्वमान्य था और सर्वश्रेष्ठ माना जाता था। अतः अब
सरयूपारीण ब्राह्मणों' का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) - १
जातियों की उत्पत्ति आजकल हिन्दू जाति में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र ये चार वर्ण पाये जाते हैं। इन सबके अनेक भेद-