श्रेणी: साहित्य
कुल 7 लेख
ए हरि, बंदओं तुअ पद नाए ~ विद्यापति
जतने जतेक धन पाएँ बटोरल मिलि-मिलि परिजन खाए। मरनक बेरि हरि केओ नहि पूछए एक करम सँग जाए॥ ए हरि, बंदओं तुअ पद नाए। तुअ पद
आगे माई एहन उमत बर लाइल ~ विद्यापति
आगे माई एहन उमत बर लाइल हिमगिरि देखि-देखि लगइछ रंग। एहन बर घोड़बो न चढ़इक जो घोड़ रंग-रंग जंग॥ बाधक छाल जे बसहा पलानल सा
माधव, हम परिनाम निरासा ~ विद्यापति
माधव, हम परिनाम निरासा। तोहे जगतारन दीन दयाराम अतए तोहर बिसबासा॥ आध जनम हम नींद गमाओल जरा सिसु कत दिन गेला। निधुबन रमनि-
कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ ~ विद्यापति
कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ। दुखहि जनम भेल दुखहि गमाएब सुख सपनहु नहिं भेल, हे भोला... आछत चानन अवर गंगाजल बेलपात तोहि देब
आज नाथ एक बर्त्त माँहि सुख लागत है ~ विद्यापति
आज नाथ एक बर्त्त माँहि सुख लागत हे। तोहें सिव धरि नट वेष कि डमरू बजाएब हे॥ भल न कहल गउरा रउरा प्राजु सु नाचब हे। सदा सोच
जय-जय संकर जय त्रिपुरारि ~ विद्यापति
जय-जय संकर जय त्रिपुरारि। जय अध पुरुष जयति अध नारि॥ आध धवल तनु आधा गोरा। आध सहज कुच आध कटोरा॥ आध हड़माल आध गजमोति। आध चा
जय जय भैरव असुर-भयाउनि ~ विद्यापति
जय जय भैरव असुर-भयाउनि, पसुपति-भामिनि माया। सहज सुमति बर दिअहे गोसाउनि अनुगति गति तुअ पाया॥ बासर-रैनि सबासन सोभित चरन, च