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सरयूपारीण ब्राह्मणों’ का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) – ११
गोत्रों में प्रमुख ब्राह्मण वंश अगस्त्य - पाण्डेय, त्रिपाठी उपमन्यु - ओझा, पाठक कण्व - द्विवेदी कश्यप - शुक्ल, मिश्र, पाण्डेय, ओझा, पाठक, द्विवेदी, चत
सरयूपारीण ब्राह्मणों’ का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) – १०
गोत्र 'गोत्र' शब्द के कई अर्थ होते हैं। किसी व्यक्ति के गोत्र से तात्पर्य उस व्यक्ति के आदि पुरुष से होता है जो कि उस वंश का प्रवर्तक होता है। सबसे प्
शिव मानस पूजा ~ श्रीशङ्कराचार्यस्य
रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः स्नानं च दिव्याम्बरं नानारत्नविभूषितं मृगमदामोदाङ्कितं चन्दनम् । जातीचम्पकबिल्वपत्ररचितं पुष्पं च धूपं तथा दीपं देव दयानिधे
ए हरि, बंदओं तुअ पद नाए ~ विद्यापति
जतने जतेक धन पाएँ बटोरल मिलि-मिलि परिजन खाए। मरनक बेरि हरि केओ नहि पूछए एक करम सँग जाए॥ ए हरि, बंदओं तुअ पद नाए। तुअ पद परिहरि पाप-पयोनिधि पारक कओन उप
आगे माई एहन उमत बर लाइल ~ विद्यापति
आगे माई एहन उमत बर लाइल हिमगिरि देखि-देखि लगइछ रंग। एहन बर घोड़बो न चढ़इक जो घोड़ रंग-रंग जंग॥ बाधक छाल जे बसहा पलानल साँपक भीरल तंग। डिमक-डिमक जे डमर
माधव, हम परिनाम निरासा ~ विद्यापति
माधव, हम परिनाम निरासा। तोहे जगतारन दीन दयाराम अतए तोहर बिसबासा॥ आध जनम हम नींद गमाओल जरा सिसु कत दिन गेला। निधुबन रमनि-रभस रंग मातल तोहि भजब कोन बेला
कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ ~ विद्यापति
कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ। दुखहि जनम भेल दुखहि गमाएब सुख सपनहु नहिं भेल, हे भोला... आछत चानन अवर गंगाजल बेलपात तोहि देब, हे भोला... यहि भवसागर थाह कत
आज नाथ एक बर्त्त माँहि सुख लागत है ~ विद्यापति
आज नाथ एक बर्त्त माँहि सुख लागत हे। तोहें सिव धरि नट वेष कि डमरू बजाएब हे॥ भल न कहल गउरा रउरा प्राजु सु नाचब हे। सदा सोच मोहि होत कबन विधि बाँचब हे ॥
जय-जय संकर जय त्रिपुरारि ~ विद्यापति
जय-जय संकर जय त्रिपुरारि। जय अध पुरुष जयति अध नारि॥ आध धवल तनु आधा गोरा। आध सहज कुच आध कटोरा॥ आध हड़माल आध गजमोति। आध चानन सोह आध विभूति॥ आध चेतन मति
जय जय भैरव असुर-भयाउनि ~ विद्यापति
जय जय भैरव असुर-भयाउनि, पसुपति-भामिनि माया। सहज सुमति बर दिअहे गोसाउनि अनुगति गति तुअ पाया॥ बासर-रैनि सबासन सोभित चरन, चंद्रमनि चूड़ा। कतओक दैत्य मारि
सरयूपारीण ब्राह्मणों’ का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) – ९
पंक्ति और पंक्तिपावन ब्राह्मण सरयूपारीण ब्राह्मणों में पहिले बहुत सुशिक्षित, सच्चरित्र, आचारनिष्ठ ब्राह्मण हुये हैं। इन ब्राह्मणों से सरयूपारीण ब्राह्
सरयूपारीण ब्राह्मणों’ का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) – ८
सरयूपारीण ब्राह्मण की विशेषताएँ सरयूपारीण ब्राहणों में तीन विशेषताएँ पाई जाती हैं- (१) पंक्ति, (२) भोजन सम्बन्धी विचार, (३) गोत्र प्रवरादि। इनका संक्ष
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सरयूपारीण ब्राह्मणों में 'घर' सरयूपारीण ब्राह्मणों में प्रत्येक गोत्र वाले तथा एक स्थान पर रहने वाले औ परिवार वृद्धि आदि कारणों से अलग दूर जा कर बस जा
सरयूपारीण ब्राह्मणों’ का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) – ६
सरयूपारीण ब्राह्मण वंश में परिवर्तन किसी दूसरे गोत्र के ब्राह्मण की गद्दी (राशि) पर जाने पर वंश में परिवर्तन हो जाता है। जैसे- शांडिल्य गोत्रीय पोहिला
सरयूपारीण ब्राह्मणों’ का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) – ५
सरयूपारीण ब्राह्मण-भेद सरयूपारीण ब्राह्मण वर्ग में शुक्ल, त्रिपाठी, मिश्र, पाण्डेय, पाठक, उपाध्याय, चतुर्वेदी और ओझा ब्राह्मण होते हैं। व्यवहार में इन
सरयूपारीण ब्राह्मणों’ का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) – ४
सरयूपार की सीमा सरयूपार भू भाग की सीमा दक्षिण में सरयू नदी, उत्तर में सारन और चम्पारन का कुछ भाग, पश्चिम में मनोरमा या रामरेखा नदी, पूर्व में गंगा और
सरयूपारीण ब्राह्मणों’ का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) – ३
ब्राह्मण जन्म या कर्म से विशेष : यह लेक सरयूपारीण ब्राम्हणो के इतिहास से सम्बंधित ग्रथ का भाग है इस लिए यहाँ प्रेषित किया गया है , किन्तु इसे पढ़ते हु
श्री षोडश बाहु नृसिंह अष्टकम
#### ॥ श्रीषोडशबाहुनृसिंहाष्टकम् ॥ भूखण्डं वारणाण्डं परवरविरटं डंपडंपोरुडंपं, डिं डिं डिं डिं डिडिम्बं दहमपि दहमैः झम्पझम्पैश्चझम्पैः । **तुल्यास्तुल्
भवान्यष्टकम् :
न तातो न माता न बन्धुर्न दाता न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता । न जाया न विद्या न वृत्तिर्ममैव गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥१॥ भवाब्धावपारे म
शिवपञ्चाक्षरनक्षत्रमालास्तोत्रम्
।।श्रीः।। ।।शिवपञ्चाक्षरनक्षत्रमालास्तोत्रम्।। श्रीमदात्मने गुणैकसिन्धवे नमः शिवाय धामलेशधूतकोकबन्धवे नमः शिवाय। नामशेषितानमद्भवान्धवे नमः शिवाय पामरे
द्वादशलिङ्गस्तोत्रम्
।।श्रीः।। ।।द्वादशलिङ्गस्तोत्रम्।। सौराष्ट्रदेशे वसुधावकाशे ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्। भक्तिप्रदानाय कृतावतारं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये।।1।। श्रीशैल
अर्धनारीश्वरस्तोत्रम्
।।श्रीः।। ।।अर्धनारीश्वरस्तोत्रम्।। चाम्पेयगौरार्धशरीरकायै कर्पूरगौरार्धशरीरकाय। धम्मिल्लकायै च जटाधराय नमः शिवायै च नमः शिवाय।।1।। कस्तूरिकाकुङ्कुमचर
दक्षिणामूर्तिस्तोत्रम्
।।श्रीः।। ।।दक्षिणामूर्तिस्तोत्रम्।। उपासकानां यदुपासनीय मुपात्तवासं वटशाखिमूले। तद्धाम दाक्षिण्यजुषा स्वमूर्त्या जागर्तु चित्ते मम बोधरूपम्।।1।। अद्र
कालभैरवाष्टकम्
।।श्रीः।। ।।कालभैरवाष्टकम्।। देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रबिन्दुशेखरं कृपाकरम्। नारदादियोगिबृन्दवन्दितं दिगम्बरं काशिकापुराधिनाथकालभै