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शिवापराधक्षमापणस्तोत्रम्

।।श्रीः।। ।।शिवापराधक्षमापणस्तोत्रम्।। आदौ कर्म प्रसङ्गात्कलयति कलुषं मातृकुक्षौ स्थितं मां विण्मूत्रामेध्यमध्ये क्वथयति नितरां जाठरो जातवेदाः। यद्यद्

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शिवपादादिकेशान्तवर्णनस्तोत्रम्

।।श्रीः।। ।।शिवपादादिकेशान्तवर्णनस्तोत्रम्।। कल्याणं नो विधत्तां कटकतटलसत्कल्पवाटीनिकुञ्ज क्रीडासंसक्तविद्याधरनिकरवधूगीतरुद्रापदानः। तारैर्हेरम्बनादैस

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शिवानन्दलहरी

।।श्रीः।। ।।शिवानन्दलहरी।। कलाभ्यां चूडालंकृतशशिकलाभ्यां निजतपः फलाभ्यां भक्तेषु प्रकटितफलाभ्यां भवतु मे। शिवाभ्यामस्तोकत्रिभुवनशिवाभ्यां हृदि पुन र्भ

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श्रीदक्षिणामूर्तिवर्णमालास्तोत्रम्

।।श्रीः।। ।।श्रीदक्षिणामूर्तिवर्णमालास्तोत्रम्।। मित्येतद्यस्य बुधैर्नाम गृहीतं यद्भासेदं भाति समस्तं वियदादि। यस्याज्ञातः स्वस्वपदस्था विधिमुख्या स्त

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श्रीदक्षिणामूर्त्यष्टकम्

।।श्रीः।। ।।श्रीदक्षिणामूर्त्यष्टकम्।। विश्वं दर्पणदृश्यमाननगरीतुल्यं निजान्तर्गतं पश्यन्नात्मनि मायया बहिरिवोद्भूतं यथा निद्रया। यः साक्षात्कुरुते प्

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श्रीमृत्युंजयमानसिकपूजास्तोत्रम्

।।श्रीः।। ।।श्रीमृत्युंजयमानसिकपूजास्तोत्रम्।। कैलासे कमनीयरत्नखचिते कल्पद्रुमूले स्थितं कर्पूरस्फटिकेन्दुसुन्दरतनुं कात्यायनीसेवितम्। गङ्गातुङ्गतरङ्ग

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दशश्लोकीस्तुतिः

।।श्रीः।। ।।दशश्लोकीस्तुतिः।। साम्बो नः कुलदैवतं पशुपते साम्ब त्वदीया वयं साम्बं स्तौमि सुरासुरोरगगणाः साम्बेन संतारिताः। साम्बायास्तु नमो मया विरचितं

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शिवपञ्चाक्षरनक्षत्रमालास्तोत्रम्

।।श्रीः।। ।।शिवपञ्चाक्षरनक्षत्रमालास्तोत्रम्।। श्रीमदात्मने गुणैकसिन्धवे नमः शिवाय धामलेशधूतकोकबन्धवे नमः शिवाय। नामशेषितानमद्भवान्धवे नमः शिवाय पामरे

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शिवकेशादिपादान्तवर्णनस्तोत्रम्

।।श्रीः।। ।।शिवकेशादिपादान्तवर्णनस्तोत्रम्।। देयासुर्मूर्ध्नि राजत्सरससुरसरित्पारपर्यन्तनिर्य त्प्रांशुस्तम्बाः पिशङ्गास्तुलितपरिणतारक्तशालीलता वः। दु

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वेदसारशिवस्तोत्रम्

।।श्रीः।। ।।वेदसारशिवस्तोत्रम्।। पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम्। जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं महादेवमेकं स्मरामि स्मरार

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शिवभुजंगम्

।।श्रीः।। ।।शिवभुजंगम्।। गलद्दानगण्डं मिलद्भृङ्गषण्डं चलच्चारुशुण्डं जगत्त्राणशौण्डम्। कनद्दन्तकाण्डं विपद्भङ्गचण्डं शिवप्रेमपिण्डं भजे वक्रतुण्डम्।।1

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शिवनामावल्यष्टकम्

।।श्रीः।। शिवनामावल्यष्टकम् हे चन्द्रचूड मदनान्तक शूलपाणे स्थाणो गिरीश गिरिजेश महेश शंभो। भूतेश भीतभयसूदन मामनाथं संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष।।1।। हे पा

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उमामहेश्वरस्तोत्रम्

।।श्रीः।। ।।उमामहेश्वरस्तोत्रम्।। नमः शिवाभ्यां नवयौवनाभ्यां परस्पराश्िलष्टवपुर्धराभ्यां नगेन्द्रकन्यावृषकेतनाभ्यां नमो नमः शंकरपार्वतीभ्याम्।।1।। नमः

सरयूपारीण ब्राह्मणों’ का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) – २
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सरयूपारीण ब्राह्मणों’ का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) – २

इतिहासकार और धर्मग्रन्थ दोनों यह बतलाते हैं कि समाज में 'ब्राह्मण वर्ण' सर्वमान्य था और सर्वश्रेष्ठ माना जाता था। अतः अब 'ब्राह्मण' शब्द पर विचार करना

सरयूपारीण ब्राह्मणों' का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) - १
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सरयूपारीण ब्राह्मणों' का इतिहास (वंशावली, गोत्रावली और आस्पद नामावली सहित) - १

जातियों की उत्पत्ति आजकल हिन्दू जाति में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र ये चार वर्ण पाये जाते हैं। इन सबके अनेक भेद-उपभेद हो गये हैं। 'सरयूपारीण ब